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March 24, 2023

Rahul Gandhi Disqualified : चुनाव लड़ने पर लग सकता है 8 साल का बैन , बंगले पर भी लटकी तलवार

नई दिल्ली | कांग्रेस को एक बड़ा झटका देते हुए, अदालत द्वारा राहुल गांधी को उनकी ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी पर दोषी ठहराए जाने के बाद, अब लोकसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया है। उनकी इस अयोग्यता की अधिसूचना तब आती है जब कांग्रेस पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी रूप से बैकफुट पर है और उसने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी छोड़ते देखा है। अदालत ने गुरुवार (24 मार्च) को राहुल गांधी को मानहानि मामले में दोषी ठहराया और दो साल कैद की सजा सुनाई। हालाँकि, अदालत ने 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित कर राहुल को ज़मानत भी दे दी, जिससे उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने का वक़्त मिल गया। अब आगे अगर राहुल गांधी उच्च न्यायालय में केस जीत जाते हैं तो सजा से बच सकते हैं। EC ( भारतीय निर्वाचन आयोग ) कर सकता है उपचुनाव की घोषणा राहुल की अयोग्यता के बाद अब वायनाड लोकसभा क्षेत्र अब खाली हो गया है। इस खाली जगह को भरने के लिए भारत निर्वाचन आयोग अब उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक की तलवार यदि गुजरात न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले पर रोक नहीं लगाई जाती है या इसे किसी भी उच्च न्यायालय द्वारा पलटा नहीं जाता है, तो राहुल अगले छह वर्षों के लिए चुनाव लड़ने का अवसर खो सकते है। कानून के नियमों के मुताबिक उन्हें अगले आठ साल तक चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार एक व्यक्ति को किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है और कम से कम दो साल के कारावास की सजा सुनाई जाती है (उप-धारा (1) या उप-धारा में निर्दिष्ट किसी भी अपराध के अलावा) (2)) इस तरह की सजा की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा और उसकी रिहाई के बाद से छह साल की एक और अवधि के लिए अयोग्य बना रहेगा। इसलिए वह 2024 के लोकसभा चुनाव सहित अगले आठ वर्षों तक चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होंगे। राहुल का बंगला ! चूंकि वह अब लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राहुल गांधी को अब सरकार द्वारा केंद्रीय दिल्ली सरकार का बंगला खाली करने के लिए भी कहा जा सकता है।

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भारत के सबसे पसंदीदा सीएम बने योगी आदित्यनाथ, देश ही नहीं विदेशों में भी मची है धूम

लखनऊ | योगी आदित्यनाथ शनिवार को अपने दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा करने जा रहे हैं। इसके साथ ही उनकी लोकप्रियता में भी गजब का इजाफा देखने को मिला है। भारत के विभिन्न राज्य के लोगों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंडिया के फेवरेट सीएम बनकर उभरे हैं। यही नहीं विदेशों में बसे भारतीयों में भी सीएम योगी को लेकर जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार सीएम योगी के समर्थन में हैशटेग ट्रेंड करता रहता है। गुरुवार को सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर हैशटैग #IndiaKeFavouriteCM ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देश का सबसे फेवरेट मुख्यमंत्री बताया गया है। इस ट्रेंड में यूपी ही नहीं तमिलनाडु, पंजाब, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उत्तराखंड के लोगों ने योगी आदित्यनाथ को सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री बताया है। यही नहीं जर्मनी और स्पेन से भी लोगों ने योगी को बेस्ट सीएम बताया है। सोशल मीडिया पर करोड़ों यूजर्स के बीच सीएम योगी और बदलते उत्तर प्रदेश को लेकर चर्चाएं आम हैं। गौरतलब है कि यूपी से माफिया और गुंडाराज के खात्मे के अलावा जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा, शिक्षा, अपराध, इन्फ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेस वे, 35 लाख करोड़ का निवेश और रोजगार के मोर्चे पर बेहतरीनब प्रदर्शन किया है, उसे देखते हुए सीएम योगी को लेकर क्रेज बढ़ते हुए साफ देखा जा सकता है। इसके अलावा जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दशकों से बने परसेप्शन को तोड़ते हुए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में ऊंचाइयों को हासिल किया है, उसे भी लोगों की सराहना मिल रही है। साथ ही विरासत का सम्मान और अयोध्या, काशी, मथुरा सहित चित्रकूट, नैमिश और प्रयागराज में जिस तरह मूलभूत सुविधाओं का विकास करते हुए धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है, उसे लेकर भी लोगों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सकारात्मक भाव बढ़ा है। साथ ही मिथकों को तोड़ते हुए जैसे उन्होंने नोएडा का दौरा किया, लोग सोशल मीडिया पर इसकी भी सराहना करते दिख रहे हैं।

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क्या जेल जाएंगे राहुल ? संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद,कांग्रेस नेता के पास क्या कानूनी विकल्प?

नई दिल्ली | कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। लोकसभा सचिवालय की तरफ से इसका आदेश भी जारी कर दिया गया है। राहुल को सूरत की एक अदालत ने गुरुवार को ही मानहानि के मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। राहुल पर 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी सरनेम’ पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसी मामले में राहुल पर गुजरात के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था। नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। सवाल ये उठता है की देश की सबसे पुराणी राजनीतिक पार्टी वके नेता राहुल गाँधी के पास आगे के लिए क्या विकल्प बचे हैं? क्या वो जेल जाएंगे ? आइये इन् सवालों पर विचार करते हैं! क्यों गई राहुल गांधी की सदस्यता? लोक-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के मुताबिक, अगर किसी नेता को दो साल या इससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है, तो उसे सजा होने के दिन से उसकी अवधि पूरी होने के बाद आगे छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान है। अगर कोई विधायक या सांसद है तो सजा होने पर वह अयोग्य ठहरा दिया जाता है। उसे अपनी विधायकी या सांसदी छोड़नी पड़ती है। इसी नियम के तहत राहुल की सदस्यता चली गई। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि सूरत की जिस अदालत ने राहुल को सजा सुनाई है, उस अदालत ने राहुल को फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए एक महीने का समय दिया है। तब तक राहुल की सजा पर रोक है, मतलब वह इस दौरान जेल जाने से बचे रहेंगे। उपाध्याय आगे कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, ऐसे मामलों में सजा निलंबित होने का मतलब दोषी को केवल जेल जाने से राहत मिलती है लेकिन सजा के अन्य असर प्रभावी रहेंगे। जैसे कि अगर कोई संसद या विधानसभा का सदस्य है तो उसकी सदस्यता चली जाएगी, वोट देने का अधिकार भी खत्म हो जाएगा। चूंकि कोर्ट ने राहुल को दोषी करार कर दिया है। इसलिए नियम के अनुसार राहुल की सदस्यता चली गई है। अब आगे क्या है राहुल के पास विकल्प? सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि राहुल के पास अभी सिर्फ दो विकल्प है। उन्होंने बताया कि अगर वो कानूनी तरीके से आगे नहीं बढ़ते हैं तो आने वाले दिनों में राहुल गांधी को जेल भी जाना पड़ सकता है। 1. सजा के खिलाफ सेशंस कोर्ट में जाना होगा: राहुल गांधी को सजा सुनाने वाली सूरत की अदालत ने उन्हें एक महीने का समय दिया है। इस एक महीने के अंदर राहुल को कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में याचिका दायर करना होगा। इसके बाद कोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी का भविष्य निर्भर होगा। 2. संसद की सदस्यता बचाने के लिए हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं : सूरत की अदालत का फैसला आने के बाद नियम के अनुसार ही राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म की गई है। ऐसे में अगर वह अपनी सदस्यता वापस हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रूख अख्तियार करना पड़ेगा। हालांकि, उम्मीद कम है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहुल को इस मसले पर राहत मिले। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल पर दोष साबित हो चुका है। ऐसे में अगर राहुल को मानहानि केस में सजा से राहत मिले तब ही वह अपनी सदस्यता बचाए रख सकते हैं। क्या जेल जाएंगे राहुल? अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि अगर राहुल गांधी सेशंस कोर्ट जाते हैं और वहां से उन्हें राहत मिलती है तो ही वह जेल जाने से बच सकते हैं। अगर सेशंस कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है तो यह तय है कि राहुल को जेल जाना पड़ सकता है। इसके अलावा उनपर छह साल का प्रतिबंध भी लग जाएगा। मतलब इस दौरान वह आठ साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।

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