याचिकाओं में अधिवक्ता जीएस गौतम सहित अन्य वकीलों ने कहा कि याचिकाकर्ता जनवरी, 2020 में अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में सरपंच बने थे। वहीं जून, 2021 में स्वायत्त शासन विभाग ने कुछ ग्राम पंचायतों को शहरी निकाय में शामिल कर लिया और चुने हुए याचिकाकर्ताओं को सरपंच और उप सरपंचों को शहरी निकाय में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बना दिया। याचिका में कहा गया कि गत 22 जनवरी को राज्य सरकार ने एक अधिूचना जारी कर कहा कि उनका पांच साल का कार्यपाल पूरा हो गया है और उनके स्थान पर प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक लगा दिया, जबकि कई अन्य ग्राम पंचायतों में कार्यकाल पूरा होने के बाद भी सरपंचों को प्रशासक लगा रखा है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को हटाकर उनके साथ भेदभाव किया गया है। इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि याचिकाकर्ता अदालत से अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए आदेश जारी करने की गुहार कर रहे हैं। जबकि यह आदेश तभी दिया जा सकता है, जब याचिकाकर्ताओं के कानूनी अधिकार की अवहेलना हो। जबकि याचिकाकर्ताओं का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। दोनों पक्षों की बहस सुनकर अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए जल्दी चुनाव कराने की मंशा जताई है।
Related Posts
34 वर्ष पुराने हत्या के मामले में दो आरोपी बरी
ख़बर शेयर करें -मामले के अनुसार, 22 सितंबर 1991 को थाना डीबी, जिला हनुमानगढ़ में राजा राम द्वारा मौखिक रिपोर्ट…
प्राचीन जलाशय पदम सागर में दो बच्चियां डूबी, मौत
ख़बर शेयर करें -पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली दो बच्चियों पदमसर तालाब जोधपुर मैं डूब गई है। जिस पर…
बेटी की हत्या के चार दिन बाद पिता का शव पेड़ से लटका मिला, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
ख़बर शेयर करें -बांसवाड़ा, 21 जुलाई । जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र में एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट…
