राजयोग के द्वारा स्वयं के अंदर अष्ट शक्तियों को धारण कर अष्टभुजा धारिणी बन आसुरी संस्कारों का मर्दन किया। तभी उनका नाम दुर्गा पड़ा अर्थात् दुर्गुणों का नाश करने वाली माँ। उन्होंने कहा- हमें फक्र है कि हम ऐसी माँ की संतान हैं। अभी हम भी परमात्मा शिव से सर्व शक्तियाँ लेकर स्वयं को जगदम्बा माँ समान बना सकते हैं और सृष्टि को पापाचार, भ्रष्टाचार, अनाचार से मुक्त कर भारत को फिर से देवालय सतयुग बनाने में परमात्मा शिव और माँ जगदम्बा के सहयोगी बनने का भाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
Related Posts
इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल इंटर की छात्रा ने की खुदकुशी, मकान मालिक के परिवार पर प्रताड़ना का आरोप
ख़बर शेयर करें -भागलपुर, 27 जुलाई । जिले के तातारपुर थाना क्षेत्र के उर्दू बाजार में किराये के मकान में…
शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी में चली बच्चों के उत्थान की चर्चा
ख़बर शेयर करें -प्रधान शिक्षक जतिन कुमार ने मौके पर कहा कि शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का थीम अब हर बच्चा होगा…
176 लीटर से अधिक विदेशी शराब के साथ शराब माफिया गिरफ्तार
ख़बर शेयर करें -थानाध्यक्ष मनीष कुमार के नेतृत्व में की गई इस छापेमारी में पुलिस ने 176.25 लीटर विदेशी शराब…
