हरीश रावत के साथ ही कांग्रेस भी इस वक्त भारी व्याकुलता में हैं। वजह ED का वो चाबुक, जो उनके पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर पड़ा है। लेकिन उसकी चोट सीधे हरीश रावत की राजनीति पर जाकर लग गई है। साल 2016 में जिस तरह एक स्टिंग ऑपरेशन ने हरीश रावत से सत्ता छीन ली थी। ठीक उसी तरह चुनाव से पहले उनके पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर पड़ी ये रेड क्या हरीश रावत के साथ ही कांग्रेस का भविष्य तय करने जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस्तीफे से सियासी पारा हाई
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के इस्तीफे के बाद पूरे उत्तराखंड में सियासी पारा उबाल पर है। इस इस्तीफे ने दिल्ली में बैठी कांग्रेस आलाकमान की भी नींद उड़ा दी है। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक लंबी-चौड़ी चिट्ठी लिखकर कांग्रेस के सभी प्रमुख पदों से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।
UKSSSC की VPDO परीक्षा-2016 से जुड़ा है मामला
दरअसल ये मामला UKSSSC की VPDO परीक्षा-2016 में हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। जिसमें ED ने पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व ओएसडी और वर्तमान पीए चंदन सिंह जीना के घर छापा मारा।
घंटों चली छानबीन में चंदन सिंह जीना की घर के कोने-कोने को खंगाला गया। तिजोरियों के ताले तोड़े गए और जब ED के अफसरों ने जप्त सामान की सूची बनानी शुरू की। तो जांच अधिकारियों की आंखें भी फटी की फटी रह गईं।
हरिश रावत के पीए चंदन सिंह जीना के घर से ED ने ये चीजें बरामद की:-
- 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई
- भारी मात्रा में कैश बरामद किया
- कीमती सोने के सिक्के बरामद किए गए
- इसी के साथ
- बेशकीमती लग्जरी घड़ियां
- कई अहम मोबाइल और जेवर भी
चंदन सिंह जीना के घर करोड़ों की संपत्ति मिली
अब जैसे ही चंदन सिंह जीना के घर करोड़ों की संपत्ति मिलने की खबर मीडिया में आई। सियासी गलियारों में हलचल मच गई।इसके बाद हरीश रावत ने एक लंबी पोस्ट लिखते हुए ऐलान कर दिया कि वो प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी औरराष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थाई आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
हरिश रावत ने पोस्ट किया शेयर
अपने इस फैसले की वजह बताते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने लिखा मेरे एक पूर्व सहयोगी के घर पर छापेमारी करके एक विशेष नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। मैं इस समय किसी भी सरकारी पद पर नहीं हूं। आगामी विधानसभा चुनावों में मैं नहीं चाहता कि मेरे या मेरे किसी पूर्व सहयोगी से जुड़ी किसी घटना की वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही कांग्रेस पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आए।
हरिश रावत ने कहा कि इन आरोपों पर विश्वास नहीं
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि हरीश रावत ने अपने पीए चंदन सिंह जीने पर लगे सभी आरोपों को लेकर कहा कि अगर उनके पूर्व ओएसडी ने ग्राम सेवकों की भर्ती या ओएमआर शीट में छेड़छाड़ जैसा कोई घृणित कृत्य किया है और उसके पुख्ता प्रमाण हैं। तो वे इस दुस्साहसिक कृत्य के लिए बेहद लज्जित हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इन आरोपों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है।
कांग्रेस इस घटना को बता रही साजिश
वहीं कांग्रेस इस पूरी घटना को राजनीतिक साजिश बता रही है। साल 2017 में सत्ता से विदाई और 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए अब स्थितियां बिल्कुल भी अनुकूल नहीं हैं। यहां तक कि पार्टी के अंदर भी उनके खिलाफ कई मोर्चे खुले हुए हैं।
कथित स्टिंग ने उनकी सरकार का किया था तख्तापलट
ये पहली बार नहीं है जब हरीश रावत किसी बड़े सियासी भंवर में फंसे हों, साल 2016 में जब हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। तब कथित स्टिंग ने उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया था। मार्च 2016 में उत्तराखंड में राजनीतिक संकट चल रहा था। कांग्रेस के कई विधायक बागी हो गए थे। तभी एक निजी समाचार चैनल और उसके पत्रकार ने एक वीडियो जारी किया। जिसमें दावा किया गया था कि हरीश रावत अपनी सरकार को बचाने और बागी विधायकों को वापस लाने के लिए पैसों के लेन देन की बात कर रहे हैं।
जब गिर गई थी रावत की सरकार
मई 2016 में एक और कथित वीडियो सामने आया। जिसमें बागी विधायकों को 25 से 30 लाख रुपये तक देने की खुली चर्चा हो रही थी। उस एक स्टिंग वीडियो ने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में ऐसी हलचल पैदा की। उन्होंने केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर दी। मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का आदेश हुआ। जिसके बाद हरीश रावत की सरकार गिर गई।
विधायक की खरीद-फरोख्त के आरोपों को किया था खारिज
हालांकि हरीश रावत ने हमेशा उस स्टिंग वीडियो में अपनी मौजूदगी की बात को स्वीकार किया। लेकिन विधायकों की खरीद-फरोख्त रिश्वत देने या भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया। हरिश रावत उस स्टिंग को लेकर हमेशा कहते रहे कि ये भारतीय जनता पार्टी द्वारा रची गई एक नीच साजिश थी। इस मामले में सीबीआई ने हरीश रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उनसे पूछताछ भी की गई। बाद में अदालत के आदेश पर नेताओं के वॉयस सैंपल भी लिए गए।
अगले साल उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव
अगले साल उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी सत्ता पाने के लिए दिन-रात पसीना बहा रही है। लेकिन चुनाव से ठीक पहले अपने सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत के पीए का इस तरह विवादों में घिर जाना और उनके इस्तीफे की पेशकश कर देना, कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।
