फर्जी सर्टिफिकेट मामले में BJP नेता समेत 4 गिरफ्तार, मचा हड़कंप

उत्तराखंड फर्जी सर्टिफिकेट मामले में बाजपुर में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बरखेड़ा नगर पंचायत के चेयरमैन और भाजपा नेता श्याम बिहारी भोजवाल समेत चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में एक महिला और दो अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया है।

बाजपुर में हाईटेक गिरोह का पर्दाफाश

असल में, बाजपुर में उत्तर प्रदेश के एक बेहद शातिर और हाईटेक गिरोह द्वारा फर्जी सरकारी प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) बनाने के काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे फर्जीवाड़े के सामने आते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में पूरी तरह से हड़कंप है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम पंकज उपाध्याय, एसडीएम ऋचा सिंह और तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने सभी आरोपियों को सीओ अखिलेश कुमार, कोतवाल नरेश चौहान, एसएसआई जसविंदर सिंह और एसआई कैलाश चंद्र की सुपुर्दगी में सौंप दिया है। देर रात सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर कानूनी मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

एसडीएम ऋचा सिंह ने ‘क्राइम पुलिस’ की तर्ज पर बिछाया जाल

फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने में बाजपुर की एसडीएम ऋचा सिंह ने बेहद मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने किसी पेशेवर ‘क्राइम पुलिस’ या डिटेक्टिव की तर्ज पर अपनी पूरी टीम को साथ लेकर दिनभर बाजपुर से लेकर संबंधित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। उन्होंने खुद मौके पर जाकर कागजातों का मिलान किया और गिरोह के नेटवर्क को बेनकाब किया।

एडीएम पंकज उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि यह गिरोह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले लोगों के फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाण पत्र तैयार कराता था। इन फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आगे चलकर नीट (NEET) जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण और सरकारी सीटों पर एडमिशन पाने के लिए किया जा रहा था।

एडीएम ने खुलासा किया कि यह गैंग बहुत ही शातिर तरीके से उन लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था, जिनके नाम संदिग्धों से मेल खाते थे। कागजात देखने में पहली नजर में पूरी तरह असली और सही लगते थे, लेकिन जब ग्राउंड पर जाकर जांच की गई तो यूपी के इन निवासियों का बाजपुर या आसपास कोई वास्तविक वजूद या साक्ष्य नहीं मिला। एडीएम ने बताया कि अभी 19 अन्य संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच-पड़ताल बाकी है।

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अधिकारियों को धोखा देने का बनाया था अनोखा तरीका

जांच के दौरान गिरोह की कार्यशैली को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। एडीएम ने बताया कि जब भी कोई लेखपाल या पटवारी प्रमाण पत्र के सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए मौके पर पहुंचता था, तो यह गैंग पहले से ही अपने फर्जी लोगों को वहां खड़ा रखता था। अधिकारी जब पास-पड़ोस में पूछताछ करते, तो ये फर्जी गवाह अधिकारियों को गुमराह करते हुए कहते कि ‘हाँ, ये लोग यहीं रहते हैं।’ इस तरह अधिकारियों को झांसे में रखकर फर्जी रिपोर्ट लगवा ली जाती थी।

वकील की भूमिका की जांच जारी

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल में बाजपुर का ही एक स्थानीय वकील (अधिवक्ता) भी मुख्य भूमिका में शामिल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वकील की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।

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