याचिका में अधिवक्ता शांतनु पारीक ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र को अपना प्रतिनिधि चुनने का संवैधानिक अधिकार है। अपने प्रतिनिधि के माध्यम से ही विद्यार्थियों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केरल विश्वविद्यालय के मामले में इसे मूलभूत अधिकार माना है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट कर चुका है कि मूलभूत अधिकार को किसी कानून या कोर्ट आदेश से छीना नहीं जा सकता। वहीं लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत हर साल छात्रसंघ चुनाव कराए जाने चाहिए। कमेटी की सिफारिश के अनुसार सत्र शुरु होने के छह से आठ सप्ताह के भीतर छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। याचिका में कहा गया कि विश्वविद्यालय ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एक कोड ऑफ कंडक्ट बना रखा है और यदि उसकी अवहेलना होती है तो नियमानुसार कार्यवाही का प्रावधान भी किया गया है। इसके बावजूद विवि प्रशासन की ओर से ही इस कमेटी की सिफारिशों को नहीं माना जा रहा। याचिका में कहा गया कि कमेटी की सिफारिश होने सुप्रीम कोर्ट की ओर से इसे मूलभूत अधिकार घोषित करने के बावजूद भी राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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