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उत्तर प्रदेश : सिद्धार्थनगर DM पर भड़के MLA विनय वर्मा, जमकर हुई बहसबाजी, देखिये वीडियो

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में शोहरतगढ़ से अपना दल विधायक विनय वर्मा और जिलाधिकारी संजीव रंजन के बीच बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विधायक विनय वर्मा डीएम पर भड़कते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो में विधायक चिल्लाते हुए डीएम से अपने प्रश्नों के जवाब मांगते नजर आ रहे हैं। https://www.instagram.com/reel/CtitLQvITUA/?utm_source=ig_web_copy_link&igshid=MzRlODBiNWFlZA== आखिर क्यों हुई बहस विधायक का कहना है कि उनके प्रश्नों का जवाब लिखित में दिया जाए। उनका आरोप है कि कोई अधिकारी जवाब नहीं देते हैं। वीडियो में विधायक डीएम से कह रहे हैं – “आपसे भी पूछा लेकिन आपने ने भी कोई जवाब नहीं दिया।” दरअसल, विधायक वर्मा अपने क्षेत्र में चल रहे कार्यों की जानकारी मांग रहे थे। इस दौरान विधायक वर्मा गुस्से में अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर देते हैं, जिसके बाद अधिकारी मीटिंग का बहिष्कार करते हुए उठ खड़े होते है। बाद सभी अधिकारियों को दोबारा समझाकर बैठाया जाता है। क्या बोले DM ? इस मामले में डीएम संजीव रंजन ने कहा कि यह कोई बहस का मामला नहीं है। विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी मांग रहे थे। जिनकी जानकारी उनको उपलब्ध करवा दी गई। उन्होंने इसका लिखित में भी जवाब मांगा है, वो भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Lucknow News :सर्वेंट क्वॉर्टर में मिली शख्स की लाश, शक के घेरे में बेटा

उत्तर प्रदेश | लखनऊ के हजरतगंज स्थित एक मकान के सर्वेंट क्वॉर्टर में 60 साल के विनोद कश्यप की लाश मिली है। पुलिस ने बेटे पर ही हत्या की आशंका जताई है। बेटा मौके से फरार है। दरअसल, विनोद कश्यप अपने परिवार के साथ एक वकील के घर में सर्वेंट क्वॉर्टर में रहता था। वकील का परिवार इस समय उत्तराखंड गया हुआ है। विनोद की पत्नी भी उनके साथ गई है। घर में विनोद और उनका बेटा सोनू था। बुधवार रात सोनू ने मां को फोन करके पिता की मौत होने की सूचना दी। वो ठीक से ये नहीं बता सका कि मौत कैसे हो गई। सोनू की मां ने वकील को पूरी बात बताई। वकील को शक हुआ। उन्होंने हजरतगंज पुलिस को फोन किया। सूचना मिलते ही कोतवाली से टीम मौके पर पहुंच गई। वहां सर्वेंट क्वॉर्टर में विनोद का शव पड़ा मिला। ACP अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि बेटा सोनू घर पर नहीं था। पूछताछ करने पर पता चला कि वह काफी देर से गायब है। विनोद के शरीर पर चोट के निशान हैं। अंदेशा है कि गला दबा कर पिता की हत्या करने के बाद बेटा फरार हो गया। एसीपी वर्मा ने बताया कि मृतक की पत्नी लखनऊ लौट रही हैं। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

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प्रदेश के सभी बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं का इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सीएम ने किया सम्मान

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के मेधावियों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं को निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश दिया और कहा कि जीवन में कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है। शिक्षा से आप जीवन की सभी चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। शिक्षा में भक्ति होनी चाहिए। भक्ति में रावण ने कैलाश पर्वत उठा लिया था पर अहंकार में अंगद का पैर भी नहीं उठा पाया था। अगर आपने ये सोच लिया कि अब तो 99 प्रतिशत आ गए अब मेहनत करने की जरूरत नहीं तो आपको मुश्किल होगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षा में भक्ति होने पर आप जीवन की सभी चुनौतियों को पार कर सकेंगे। आने वाले संकटों का धैर्यपूर्वक सामना करना चाहिए इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हमें जीवन में आने वाले संकटों का धैर्यपूर्वक सामना करना चाहिए और कड़ी मेहनत करनी चाहिए क्योंकि शॉर्टकट का मार्ग कभी सफलता नहीं दिलाता है। उन्होंने कहा कि अब नकलविहीन परीक्षा यूपी की हकीकत है। यह बीते छह वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले बड़े बदलाव हैं। पहले एक-डेढ़ महीने तक बोर्ड परीक्षाएं होती रहती थीं पर अब 15 दिन में बोर्ड परीक्षा होने के बाद समय पर परिणाम घोषित कर दिया जाता है। अपने पुरुषार्थ से सफलता की मंजिल को चूमना ही वास्तविक सफलता मुख्यमंत्री ने कहा कि हर चुनौती परीक्षा की घड़ी होती है। संकट सामने आए तो उससे भागने की जगह उसका सामना करना चाहिए। शॉटकर्ट का मार्ग कभी सफलता की मंजित तक नहीं पहुचा सकता। चुनौतियों से जूझ़ते हुए, ईमानदारी से और अपने पुरुषार्थ से सफलता की मंजिल को चूमना ही वास्तविक सफलता है। भारत ने कोविड कालखंड में इसे साबित करके दिखाया है, जब पूरी दुनिया इस महामारी के सामने पस्त हो गई थी, तब भारत फ्री जांच, फ्री उपचार और फ्री वैक्सिनेशन के कार्यक्रम चला रहा था। इतना ही नहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में आजादी के बाद सबसे बड़े बदलाव को भी कोविड काल में ही लागू किया गया। बिना भेदभाव योजनाएं जन-जन तक पहुंचाना ही वास्तविक रामराज्य मुख्यमंत्री ने बताया कि आज राजधानी में सभी बोर्ड के टॉप टेन मेधावियों को सम्मानित करने का कार्य किया गया है। इसके अलावा जनपद स्तर के टॉप 10 मेधावियों को भी सरकार के मंत्रीगण और जन प्रतिनिधियों ने सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि यूपी में दो करोड़ छात्र-छात्राओं को टैबलेट वितरित किया जा रहा है। इसके अलावा अभ्युदय कोचिंग, शिक्षकों को ऑनलाइन क्लास से जोड़ना। लंबे समय से रिक्त पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता की व्यवस्था की गई है। जर्जर विद्यालयों के कायाकल्प का कार्य किया गया। नए संस्थान खोले जा रहे हैं। गरीब बच्चों के लिए 18 अटल आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं। बिना किसी भेदभाव के शासन की योजनाएं जन-जन तक पहुंचाने का कार्य हो रहा है। यही वास्तविक रामराज्य है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान मेधावी बच्चों, सीतापुर की प्रियांशी सोनी, महोबा के शुभ, चंदौली के इरफान, मुरादाबाद की कोषा शर्मा, मेरठ की राधिका सिंघल और आगरा की अभिषि सिंह को सम्मानित किया। समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद, परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह व बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल रहे।

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मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में किया दर्शन-पूजन

वाराणसी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम और काशी के कोतवाल कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार विधि से पूजन अर्चन करते हुए प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। सीएम के आगमन के मद्देनजर कालभैरव मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। सीएम रविवार को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे थे।             उन्होंने रविवार को होटल ताज में G-20 सम्मेलन में पहुंचे विदेशी मेहमानों से मुलाकात की व उनके साथ डिनर किया। वहीं दूसरे दिन सोमवार को सुबह सात बजे सीएम श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां विधि विधान से बाबा का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने काशी कोतवाल कालभैरव मंदिर में शीश नवाया। इस दौरान श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर सहित अन्य उपस्थित रहे।

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कैटल डंग व कृषि अपशिष्टों को बायोगैस व स्लरी में परिवर्तित कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर है सीएम योगी का फोकस

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में गांवों के कायाकल्प के विजन को ध्यान में रखकर कार्य कर रहे सीएम योगी आदित्यनाथ अब राज्य के सभी गांवों की स्वच्छता और स्वावलंबन को ध्यान में रखकर नए एप्रोच के साथ कार्ययोजना पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश के सभी गांवों को ओडीएफ (ओपन डेफिकेशन फ्री) बनाने के अतिरिक्त ओडीएफ प्लस केटेगरीज में गांवों को अपडेट करने के लिए प्रयासरत प्रदेश सरकार ने गोबरधन और अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में तेजी कदम बढ़ाए हैं। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप, प्रदेश के सभी गांवों में गोबरधन और अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए स्वच्छता को बढ़ावा देने के साथ ही आय को बढ़ाने के प्रयासों पर भी बल दिया जा रहा है। इसी के फलस्वरूप, राज्य के सभी गांवों में कैटल डंग व कृषि अपशिष्टों को बायोगैस व स्लरी में परिवर्तित किए जाने की कार्ययोजना का क्रियान्वयन युद्धस्तर पर जारी है। इतना ही नहीं, गांवों में प्लास्टिक समेत अन्य अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर भी वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इन सब प्रयासों के जरिए प्रदेश के सभी गांवों को स्वच्छता की रैंकिंग में ऊपर लाने और उन्हें जिले, राज्य व देश स्तर पर पुरस्कृत किए जाने के लिए प्रयासरत योगी सरकार एक विस्तृत कार्ययोजना के अंतर्गत सिलसिलेवार पूरा करने की ओर बढ़ रही है। गोबरधन बनेगा स्वच्छता और आय का साधन प्रदेश के सभी गांवों में कैटल डंग व कृषि अपशिष्टों को बायोगैस व स्लरी में परिवर्तित कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की मंशा से गोबरधन योजना को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही योगी सरकार द्वारा इस विषय में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्रति जिले 50 लाख रुपए धनराशि आवंटन की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में, बायोगैस प्लांट का निर्माण गांव की सरकारी गौशालाओं से जोड़कर किया जा रहा है जिससे कि प्लांट के लिए फीड स्टॉक सुनिश्चित किया जा सके। कार्ययोजना के मुताबिक, प्लांट से निर्मित होने वाली गैस से जेनरेटर संलग्न कर गांवों के सामुदायिक स्थानों पर प्रकाश की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अतिरिक्त, इन प्लांटों से बनने वाली ऊर्जा से आटा चक्की के संचालन की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे कि सस्ती दरों पर ग्रामीण जनों को आटा पीसने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, चिह्नित परिवारों को रसोई में प्रयोग के लिए चूल्हे भी लगाकर देने के संबंध में भी वितरण की व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल, प्रदेश में 20 जिलों में गोबरधन से संबंधित प्लांट पूर्ण किए जा चुके हैं, जबकि 38 जिलों में 60 प्लांट निर्माणाधीन हैं। जिन 17 जिलों के 22 प्लांटों का कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है उन्हें भी क्रियान्वित करने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने पर जोर स्वच्छ भारत मिशन के एक महत्वपूर्ण घटक के तौर पर राज्य के सभी गांवों के मलीय कचरे के निस्तारण प्रबंधन को सुचारू बनाने और इसमें वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार वृहद स्तर पर कार्य कर रही है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस कार्य के लिए कुल 763 नगरीय निकायों में स्थापित व प्रस्तावित एफएसटीपी से 20 से 25 किमी की त्रिज्या में आने वाले गांवों को उस निकाय की एफएसटीपी से संबद्ध करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसके बाद, बचे हुए गांवों में एफएसटीपी निर्माण की कार्रवाई पंचायती राज विभाग द्वारा की जाएगी। वहीं, गांवों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 35 जिलों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई का निर्माण कराया जा रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस कार्य के लिए कुल 763 नगरीय निकायों में स्थापित प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस कार्य के लिए कुल 763 नगरीय निकायों में स्थापित व प्रस्तावित एमआरएफ सेंटर्स से 15 से 20 किमी में आने वाले गांवों को उस निकाय के एमआरएफ सेंटर से संबद्ध किया जाएगा। बचे हुए गांवों में पीडब्ल्यूएम इकाई का निर्माण पंचायती राज विभाग द्वारा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण से मिलेगी गांवों को नई पहचान स्वच्छता के क्षेत्र में ओडीएफ प्लस के विभिन्न घटकों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के चयन के लिए पेयजल व स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा स्वच्छ ग्रामीण सर्वेक्षण 2023 का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में, प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी के नेतृत्व में प्रत्येक विकास खंड की सभी ग्राम पंचायतों की सहभागिता पंजीयन के बाद जनसंख्या के आधार पर तीन केटेगरीज में बांटा जाएगा। 2000 तक, 2001 से 5000 तक व 5000 से ज्यादा आबादी वाली 5-5 ग्राम पंचायतों के रूप में कुल 15 उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा। इसी तरह, प्रत्येक विकास खंड से चयनित 15 उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों में से जिला स्तर 15 उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों का भी चयन किया जाएगा। ऐसे में, सभी जिलों से चयनित ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार द्वारा थर्ड पार्टी सत्यापन कराकर उत्कृष्ट पंचायत चयनित करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। 2 अक्तूबर को मिलेगा सम्मान प्रदेश में स्वच्छ ग्रामीण सर्वेक्षण 2023 में सहभागी सत्यापन को पूर्ण करने की विकास खंड स्तर समयावधि पर इस वर्ष एक मई से 15 जून के बीच तय की गई है। जबकि, जनपद स्तर पर 16 जून से 30 जून, राज्य स्तर पर एक जुलाई से 15 जुलाई तक और जिले स्तर पर उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर पुरस्कृत किए जाने के लिए 31 जुलाई तक की समयसीमा तय की गई है। वहीं, राज्य स्तर पर उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर पुरस्कृत करने की समयावधि 15 अगस्त तक निर्धारित की गई है। राज्य द्वारा नामित उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय स्वतंत्र संस्था द्वारा सत्यापित करने की समयसीमा 16 जुलाई से 15 अगस्त के मध्य निर्धारित है। इसी प्रकार, सभी आवेदनों की समीक्षा के बाद चयनित ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए 2 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की गई है। जाहिर है, इन मानकों पर खरा उतरकर प्रदेश के गांवों को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर प्रयास जारी कर दिए हैं।

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Khan Mubarak: यूपी के टॉप टेन अपराधियों में से एक खान मुबारक की अस्पताल में मौत, प्रदेश के टॉप टेन अपराधियों की सूची में शामिल था

हरदोई । यूपी के टॉप टेन अपराधियों में से एक और बड़ा आपराधिक साम्राज्य खड़ा करने वाले माफिया सरगना खान मुबारक की बीमारी के चलते रविवार सुबह हरदोई में मौत हो गई। वहां उसे जिला जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। वह निमोनिया से पीड़ित था। जिले के हंसवर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरसम्हार गांव निवासी खान मुबारक प्रदेश के टॉप टेन अपराधियों की सूची में शामिल था। उस पर करीब तीन दर्जन मुकदमे कई जिलों में दर्ज थे। मुख्य रूप से फिरौती और रंगदारी जैसे अपराध में लिप्त खान ने कई हत्या की वारदातों को भी अंजाम दिया था। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट में उसकी करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया था। उसका बड़ा भाई खान जफर सुपारी मुंबई के डी गैंग से जुड़ा रहा है।

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लखनऊ : पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर, UPSC छात्र ने की आत्महत्या

लखनऊ | यूपी की राजधानी लखनऊ में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे 22 साल के दलित युवक आशीष ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली। अपने पीछे छोड़े सुसाइड नोट में आशीष ने लिखा – ‘नंदू विश्वकर्मा, अरविंद, श्याम किशोर ने साजिश रचकर हम दोनों भाई- आशीष कुमार, मनीष उर्फ मयंक पर अपने मजदूरों के जरिये झूठा केस दर्ज कराया है। रहीमाबाद थाने के दरोगा राजमणि पाल, लल्लन प्रसाद पाल व सिपाही मोहित शर्मा ने मिलकर झूठी एफआईआर दर्ज की। हमने इनसे कहा कि हमारे घर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उनको चेक कर लो। धोखे से हम भाइयों को थाने पर बुलाकर सादे कागज व आधार कार्ड पर दस्तखत करा लिए…। मैं खुदकुशी करने जा रहा हूं। रहीमाबाद थाना पूरा भ्रष्ट है…। पूरा मामला कुछ इस तरह से है कि आशीष कुमार सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा था। आशीष पर मारपीट के केस में दबाव बनाने के लिए फर्जी केस लिखा गया था। रहीमाबाद थाने की पुलिस ने फर्जी केस दर्ज किया था। FIR लगाने के नाम पर 50 हजार की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत नहीं देने पर पुलिस वालों ने चार्जशीट लगा दी थी। चार्जशीट से नौकरी मिलने में दिक्कत से आशीष परेशान था। इसी घटना से आहत होकर आशीष ने फांसी लगाकर जान दे दी। घटनास्थल से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था और उस सुसाइड नोट में आशीष पुलिस वालों के नाम लिख गया। आशीष ने सुसाइड नोट में लिखा कि रहीमाबाद थाना भ्रष्ट है।  

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योगी सरकार ने वाहन स्वामियों को दी बड़ी सौगात, पांच साल के ट्रैफिक चालान किए निरस्त

लखनऊ | योगी सरकार ने प्रदेश के निजी और कामर्शियल वाहन स्वामियों को बड़ी सौगात दी है। योगी सरकार ने यूपी में लंबे समय से वाहन चालान का भुगतान न करने वाले मालिकों को रियायत देते हुए उनका चालान निरस्त कर दिया है। सीएम योगी के इस फैसले से प्रदेश के लाखों वाहन मालिकों ने राहत की सांस ली है। यह उन वाहन चालकों के लिए खुशखबरी है जिनके अलग-अलग ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में चालान काटे थे। ऐसे में जितने भी उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 के बीच चालान काटे गये हैं। उनके सभी चालान निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही जो विभिन्न न्यायालयों में लंबित है। यह सभी वाहनों पर लागू होते हैं। 2 जून 2023 के माध्यम से लागू की गयी व्यवस्था परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह ने सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि न्यायालय में उपसमित वादों की सूची प्राप्त कर इन चालानों को पोर्टल से डिलीट कर दिए जाएं। यूपी सरकार के इस कदम से बाकी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश सभी संभागीय परिवहन कार्यालयों में भेज दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि न्‍यायालय में लंबित चालान की सूची प्राप्‍त कर ई चालान पोर्टल से इसे हटा दिया जाए। आदेश के मुताबिक, एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 की अवधि में काटे गए चालानों को निरस्‍त किया जा रहा है। परिवहन आयुक्त ने बताया कि उत्तर प्रदेश अध्यादेश संख्या 2 जून 2023 के माध्यम से यह व्यवस्था लागू की गई है कि पुराने लंबित चालान निरस्त करा दिए जाएं। मालूम हो कि नोएडा में किसान इस तरह से चालान को निरस्त करने की मांग करते हुए धरना दे रहे थे। इससे पूरे उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोगों के चालान माफ होने का रास्ता साफ हो गया है। घबराने की जरूरत नहीं है वहीं, इस अवधि के बाद वाले वाहन चालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे ऑनलाइन ट्रैफिक चालान भर सकते हैं। यूपी ट्रैफिक पुलिस आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ गाड़ी का नंबर पता होना चाहिए। खास बात यह है कि गलत चालान पर आप यहीं से शिकायत भी कर सकते हैं। हालांकि, वाहन का चालान कटने पर मोबाइल नंबर पर भी मैसेज जाता है।

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कुख्यात गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी (जीवा) का क़त्ल करने वाला विजय यादव कौन है ?

उत्तर प्रदेश | लखनऊ की एक अदालत में गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या कर दी गई है। जब संजीव जीवा को सुनवाई के लिए कोर्ट लाया गया तो वहां वकील की शक्ल में मौजूद एक हमलावर ने उसे गोलियों से भून दिया। इसके बाद हमलावर विजय यादव को पकड़ लिया गया है। क्या विजय यादव कोई नामी गैंगस्टर है? विजय पर कितने आपराधिक मामले हैं? फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। लेकिन मीडिया से हुई बातचीत में विजय यादव के पिता ने अपने बेटे के बारे में काफी कुछ बताया है। लखनऊ कोर्ट परिसर में गोली मारकर संजीव जीवा की हत्या करने वाला आरोपी शूटर विजय यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के केराकत थाना क्षेत्र का रहने वाला है। घटना की जानकारी लगते ही केराकत थाने के सीओ और इंस्पेक्टर पुलिस फोर्स के साथ सरकी चौकी क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव पहुंचे। वहां विजय के परिवार से पूछताछ की गई। विजय के पिता ने बताया आरोपी विजय यादव के पिता श्यामा यादव ने बताया कि, उन्हें विजय को लेकर कोई जानकारी नहीं थी, हाल में उनका विजय से कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। उन्होंने बताया कि, विजय ने शहर के एक डिग्री कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की जिसके बाद वह काम की तलाश में मुंबई गया। मुंबई में वह टाटा की कंपनी में काम करता था, लेकिन काम में मन न लगने की वजह से उसने नौकरी छोड़ दी थी। श्यामा यादव ने बताया – 11 मई को विजय सुल्तानपुर से लखनऊ गया था। वहां भी वो नए काम की तलाश में गया था. श्यामा ने बताया कि, एक दिन विजय का फोन आया और उसने कहा कि, उसे नौकरी मिल गई है। उसने बताया कि, वह जलापूर्ति के लिए पाइप बिछाने वाली किसी कंपनी में काम करता है। विजय यादव का व्यक्तित्व विजय के पिता ने बताया कि, उसे नौकरी मिलने की मुझे खुशी. लेकिन उलसे बाद विजय से हमारा कोई संपर्क नहीं हो पाया, उसे हमने कई बार फोन किया लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ ही आता था। विजय के पिता ने बताया कि, जब मैं बाहर चाय पीने निकला तो मुझे प्रधानजी ने बताया कि आपका बेटे गोलीबारी के कारण सूर्खियों में हैं। मुझे इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। मुझे विश्वास ही नहीं था कि मेरा बेटा भी ऐसा कर सकता है. मुझे हमारे परिचित ने भी मोबाइल में उसकी फोटो बता कर पूछा कि क्या ये आपका बेटा है, मैंने उनसे कहा, हां ये मेरा बेटा है। विजय यादव के भाई ने बताया कि उसका भी विजय से कोई संपर्क नहीं हुआ था। उसने कहा कि, जब भी भाई (विजय) घर पर आता था वो किसी से बातचीत नहीं करता है, उसे खुद में ही रहने की आदत है। वह गांव में ही किसी से बात नहीं करता था। यहां तक कि वह अपने घर से भी ज्यादा बाहर नहीं निकलता था।  

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Lucknow : आयुष विभाग में दवा ढुलाई के नाम पर करोड़ों का घोटाला, अधिकारीयों के गोल मोल जवाब

लखनऊ । प्रदेश में आयुष विभाग में अस्पताल तक दवा पहुंचाने के नाम पर करोड़ों का खेल चल रहा है। आयुष मिशन और दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी की मिलीभगत से माल ढुलाई की हर साल करीब एक करोड़ 96 लाख रूपये की चपत लगा रहे हैं । प्रदेश के सभी आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक अस्पतालों में आयुष मिशन के जरिए दवाएं भेजी जाती हैं। प्रदेश में आयुर्वेदिक यूनानी के 2346 और होम्योपैथिक की 1585 डिस्पेंसरी व अस्पताल हैं। होम्योपैथिक में करीब 45 करोड़ और आयुर्वेद में करीब 65 करोड़ की हर साल दवा खरीदी जाती है। नियमानुसार दवा की आपूर्ति संबंधित अस्पताल तक होनी चाहिए, लेकिन यह दवा जिला मुख्यालय पर रखवा दी जाती है। फिर चिकित्साधिकारियों पर दवा ले जाने का दबाव बनाया जाता है। मजबूरी में चिकित्साधिकारी अपनी जेब से खर्च कर दवा अस्पताल तक ले जाते हैं। आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक अस्पतालों की संख्या मिलाकर 3931 हुआ। यदि हर अस्पताल पर दवा ले जाने का खर्च पांच हजार माना जाए तो हर साल करीब एक करोड़ 96 लाख 55 हजार रुपया खर्च होता है। पिछले चार साल से मिशन दवा आपूर्ति कर रहा है। ऐसे में चार साल में सात करोड़ 86 लाख 20 हजार रुपये का वारा न्यारा हो चुका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि डिस्पेंसरी तक दवा पहुंचाने के बजाय जिला मुख्यालय पर दवाएं भेजकर मिशन के अधिकारी और दवा कंपनी इस रुपये की बचत करती हैं। ऐसे में इस रकम की बंदरबांट होने की आशंका है। क्या कहते हैं जिम्मेदार दवा खरीदते समय यह व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए कि दवा डिस्पेंसरी तक पहुंचे। मामला संज्ञान में आया है। इसे देखा जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी। यह देखा जाएगा कि कंपनी से खरीद संबंधी प्रपत्र पर दवा कहां तक पहुंचाने की बात हुई है। किसी तरह का खेल होगा तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। – डा. दयाशंकर मिश्र दयालु, एफएसडीए एवं आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मामला संज्ञान में आया है। पहले किस स्तर पर चूक हुई। यह देखा जा रहा है। डिस्पेंसरी तक दवा पहुंचाने की पुख्ता व्यवस्था बनाई जाएगी। यह भी देखा जा रहा है कि पूर्व के वर्षों में कंपनी ने अस्पतालों तक दवा क्यों नहीं पहुंचाया? – महेंद्र वर्मा, निदेशक आयुष मिशन

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