अपील में अधिवक्ता युवराज सामंत ने कहा कि एकलपीठ ने अपीलार्थी का पक्ष जाने बिना ही उनके खिलाफ तल्ख टिप्पणियां की और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में अपीलार्थी को पक्षकार नहीं बनाया है। वहीं एसओजी ने भी अपनी चार्जशीट में उनके खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं पाए हैं और ना ही उनके खिलाफ चार्जशीट ही पेश की है। ऐसे में एकलपीठ ने बिना कोई ठोस सबूत व उन्हें सुने बिना ही आदेश दिया और टिप्पणी की। एकलपीठ का ऐसा करना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ व प्राकृतिक न्याय के प्रावधानों के खिलाफ है। इससे पूर्व आरपीएससी की तत्कालीन सदस्य मंजू शर्मा ने भी एकलपीठ के आदेश को अपील के जरिए चुनौती दी है। गौरतलब है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की एसएलपी पर 24 सितंबर को आदेश जारी कर खंडपीठ के आठ सितंबर के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग कराने की छूट दी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने खंडपीठ को तीन माह में अपीलों का निस्तारण करने को कहा था।
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