लखनऊ गजेटियर 1904 में उक्त स्थान को राजा नल के प्राचीन किले के खण्डहर के रूप में उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी उल्लेख है कि उक्त स्थान का प्राचीन नाम नलग्राम था। नलग्राम के राजा नल के किले की मुक्ति के लिए स्थानीय पासी समाज कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन दे चुका है। फिर भी अवैध अतिक्रमण अभी तक नहीं हटा है।
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