रंगनाथ महतो ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि अपने फैसले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि प्रदेश में जो कोई भी ईसाई बन गए हैं, उन्हें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का फायदा नहीं मिलना चाहिए। ऐसे मामलों को ‘संविधान के साथ धोखाधड़ी’ बताते हुए न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह चार महीने में ऐसे मामलों में कार्रवाई करें। बताएं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का फायदा सिर्फ हिंदुओं, सिखों और बौद्धों को मिलता है, उन लोगों को नहीं जो धर्म बदलकर फायदे लेते हैं।
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