जमानत याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा और अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता करीब साढ़े तीन माह से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे हैं। प्रकरण में एसीबी ने उनके खिलाफ आरोप पत्र भी पेश कर दिया है। वहीं अभी तक मुकदमा चलाने के लिए विधानसभा स्पीकर से अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक जेल में रखने से कोई लाभ नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आरोपित विधायक पर विधानसभा में पूछे गए सवाल को वापस लेने के बदले रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इस तरह का अपराध किया है। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने चारों आरोपितों को जमानत पर रिहा कर दिया है। गौरतलब है कि मामले में परिवादी ने एसीबी में शिकायत दी थी कि आरोपित एमएलए ने टोडाभीम में स्थित उसकी खानों को लेकर विधानसभा में सवाल लगाए थे। इस सवालों को वापस लेने के लिए विधायक 2.50 करोड़ रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए एसीबी ने विधायक सहित अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
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