अपनी ही सरकार के मंत्री पर भाजपाइयों के आरोप, खजान दास के आवास के बाहर किया प्रदर्शन

उत्तराखंड की सियासत में ‘अपनों’ की जंग का ऐसा चटपटा और गरमा-गरम ड्रामा देखने को मिला है, जिसने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है। बात विपक्ष की होती तो शायद कोई चौंकता नहीं, लेकिन जब अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ कैबिनेट मंत्री का बंगला घेरने पहुंच जाएं, तो मामला बेहद दिलचस्प हो जाता है।

भाजपाइयों ने किया खजान दास के आवास के बाहर प्रदर्शन

राजधानी देहरादून में रविवार को कुछ ऐसा ही सियासी भूचाल आया, जब समाज कल्याण मंत्री खजान दास के सरकारी आवास पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। चकराता विधानसभा क्षेत्र से आए इन भाजपाइयों की अगवाई कोई और नहीं, बल्कि बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री मधु चौहान कर रही थीं।

खजान दास पर लगाए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

मंत्री जी के बंगले पर धरना देकर बैठे भाजपाइयों के तेवर इतने तीखे थे कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छूट गए। आवास के बाहर “मुर्दाबाद” के जोरदार नारे गूंजने लगे। प्रदर्शनकारियों ने समाज कल्याण मंत्री खजान दास पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के बेहद संगीन आरोप जड़ दिए।

“15-20 परसेंट का कमीशन और अपनों की अनदेखी”

विरोध प्रदर्शन कर रहे नेताओं का आरोप था कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कल्याण (SCP/STSP) की सरकारी योजनाओं और बजट को पास कराने के एवज में 15 से 20 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन (कट) मांगा जा रहा है। यही नहीं, कार्यकर्ताओं ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि जनजातीय क्षेत्र चकराता में पात्र ST/SC और BJP के जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर मंत्री जी इन योजनाओं का लाभ सामान्य वर्ग व कांग्रेस से जुड़े लोगों में बांट रहे हैं।

इस हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड के राज्य मंत्री गीताराम गौड़, मधु चौहान, वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभाकर, जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और मूरत राम शर्मा समेत सैकड़ों भाजपाई शामिल रहे। अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ भाजपा नेताओं का यह सार्वजनिक गुस्सा देखकर हर कोई हैरान रह गया।

मंत्री खजान दास का तीखा पलटवार: “आरोप साबित हुए तो छोड़ दूंगा पद”

जब विरोध की चिंगारी भड़की और मामला उछला, तो समाज कल्याण मंत्री खजान दास भी चुप नहीं बैठे। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद कड़ा बयान जारी किया। खजान दास ने कहा कि एक मंत्री के तौर पर उनके ऊपर किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य की जिम्मेदारी है।

अपनी सफाई में सख्त रुख अपनाते हुए खजान दास ने दो टूक शब्दों में कहा— “अगर मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार या एक पैसे के गबन का भी आरोप साबित हो जाता है, तो मैं तुरंत अपने पद से इस्तीफा ही नहीं दूंगा खुदकुशी भी कर लूंगा।” मंत्री के इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।

भाजपा संगठन के सामने अनुशासन और गुटबाजी की बड़ी चुनौती

इस पूरे वाकये ने चकराता से लेकर देहरादून तक बीजेपी के भीतर पनप रही अंदरूनी गुटबाजी और असंतोष को चौराहे पर ला खड़ा किया है। अनुशासित पार्टी कही जाने वाली भाजपा के सामने अब यह बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया है कि अपने ही मंत्री का सार्वजनिक रूप से आवास घेरने वाले नेताओं पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए या फिर कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुनकर मामला दबाया जाए।

आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनों का यह खुल्लम-खुल्ला शक्ति प्रदर्शन और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप भाजपा संगठन के लिए गले की फांस बनते दिख रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इस ‘अपनों के गदर’ को कैसे शांत कराता है और संगठन की कार्रवाई का चाबुक किस पर चलता है!

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.