याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को गत 21 जुलाई को सत्र 2025-26 के लिए आरसीए की सीनियर सलेक्शन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति पर आरसीए की साधारण सभा ने भी सहमति दे दी थी। वहीं गत 2 नवंबर को एड हॉक कमेटी के चारों सदस्यों ने विधि विरूद्ध तरीके से याचिकाकर्ता को इस पद से हटा दिया। याचिका में इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि उसे हटाने की कार्रवाई विधि विरूद्ध और अवैध है। क्योंकि उसे हटाने की कार्रवाई एड-हॉक कमेटी के कन्वीनर की सहमति से नहीं की गई थी। कन्वीनर ने 2 नवंबर को ही अलग से आम सूचना जारी कर कहा था कि याचिकाकर्ता को हटाने की कार्रवाई गलत है। इसके अलावा याचिकाकर्ता की नियुक्ति को आरसीए की साधारण सभा ने अनुमोदित किया है। ऐसे में एक ओर जहां साधारण सभा में लिए गए निर्णय को एड-हॉक कमेटी पलट नहीं सकती, वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई में एड-हॉक कमेटी के कन्वीनर की सहमति भी नहीं है। जबकि बिना कन्वीनर कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसलिए एड-हॉक कमेटी के सदस्यों की ओर से लिए गए इस निर्णय को अवैध घोषित कर रदद किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों ओर एड-हॉक कमेटी के कन्वीनर और सदस्यों से जवाब तलब किया है।
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