याचिका में अधिवक्ता सुनील कुमार सिंगोदिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता साल 2016 में मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना में स्वास्थ्य मार्गदर्शक के पद पर संविदा पर लगा था। गत 29 सितंबर को संबंधित प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त कर दी। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि वह राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के माध्यम से नियुक्त हुआ था और संविदा भर्ती नियम के तहत पांच साल की सेवा के बाद नियमित होने का अधिकारी हो गया था। इसके बावजूद उसे झूठी शिकायत पर सेवा से अलग कर दिया गया। जबकि संविदा भर्ती नियम के नियम 18 के तहत किसी संविदा कर्मी के खिलाफ यदि कोई आरोप सिद्ध होता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है, लेकिन इससे पूर्व उसे सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा। याचिकाकर्ता को काम के प्रति लापरवाही बरतने और उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाकर सेवा से हटाया गया है, लेकिन इससे पूर्व उसे सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया। ऐसे में उसे सेवा से हटाने के आदेश को अवैध घोषित कर निरस्त किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को सेवा से हटाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
Related Posts
मिशन मोड पर निगम हटा रहा अवैध होर्डिंग, बैनर, पोस्टर
ख़बर शेयर करें -जयपुर, 04 फ़रवरी । नगर निगम सभी जोनों में अवैध होर्डिंग, बैनर, पोस्टर हटाने के लिए मिशन…
सिंजारा शनिवार को, रविवार को निकलेगी तीज माता की शोभायात्रा
ख़बर शेयर करें -रविवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की…
कानून निश्चित नहीं, समाज की जरूरत और परिस्थिति के अनुसार बदलता है-हाईकोर्ट
ख़बर शेयर करें -याचिका में अधिवक्ता टीसी व्यास ने अदालत को बताया कि साल 2021 में शहर के आमेर थाना…
