मामले के अनुसार शंभू सिंह बी.एस.ई.एस. लिमिटेड कंपनी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद पर था। कंपनी के उन्हें सेवा से हटाने को 1999 में लेबर कोर्ट में चुनौती दी गई। इस दौरान शंभूसिंह और एम एस ट्रानसेक्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत उन्हें दिल्ली कार्यालय में पुन: नियुक्ति देनी थी। तब शंभू सिंह ने बकाया वेतन की मांग छोड़ने पर सहमति जताई। यह तय हुआ कि उनका बी.एस.ई.एस. लिमिटेड से कोई संबंध नहीं होगा, लेकिन 2004 में ट्रानसेक्स सर्विसेज ने दोबारा शंभूसिंह की सेवाएं खत्म कर दीं। तब उन्होंने 2005 में एक नया दावा किया। लेबर कोर्ट-प्रथम ने 2015 में उसके मामले में अवार्ड देते हुए कहा कि शंभू सिंह और बी.एस.ई.एस. लिमिटेड के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है, बल्कि विवाद ट्रानसेक्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है। इसके बावजूद भी 9 जून 2017 को अतिरिक्त श्रम आयुक्त जयपुर ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर व अनिल अंबानी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दे दी। जिस पर 11 सितंबर 2017 को मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, जयपुर ने उनके खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 29 सहपठित धारा 34 के तहत प्रसंज्ञान लिया।
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