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Mukhtar Ansari

Mukhtar Ansari News :आजमगढ़ के MP-MLA कोर्ट में मुख्तार केस की सुनवाई आज, 2014 में हुए मजदूर हत्याकांड में है आरोपी

आजमगढ़ । MP-MLA कोर्ट में आज माफिया मुख्तार अंसारी की वर्चुअल पेशी होनी है। इस दौरान गवाही भी होनी है। माफिया मुख्तार अभी बांदा जेल में बंद है। इससे पहले इस मामले में सात लोगों की गवाही हो चुकी है। आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र के ऐरा कला गांव में 6 फरवरी, 2014 को सड़क निर्माण में लगे बिहार के मजदूर राम इकबाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मुख्तार अंसारी सहित 11 लोग आरोपी बनाए गए थे। मुख्तार अंसारी पर षडयंत्र रचने का आरोप लगा था। इसमें बाद में गैंगस्टर एक्ट का भी मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना में शामिल कई आरोपियों की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। मजदूर की हत्या के मामले में पुलिस का गवाह दुर्गा प्रताप सिंह 5 मई को अपने बयान से मुकर गया था। दुर्गा प्रताप सिंह ने बयान दिया था कि इस हत्या की साजिश मुख्तार अंसारी ने रची है। इस मामले में सुनवाई के दौरान गवाह दुर्गा प्रताप सिंह ने कहा कि उसने पुलिस को इस तरह का कोई बयान नहीं दिया था। ना ही वह घटना से जुड़े किसी को जानता है

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कुख्यात गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी (जीवा) का क़त्ल करने वाला विजय यादव कौन है ?

उत्तर प्रदेश | लखनऊ की एक अदालत में गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या कर दी गई है। जब संजीव जीवा को सुनवाई के लिए कोर्ट लाया गया तो वहां वकील की शक्ल में मौजूद एक हमलावर ने उसे गोलियों से भून दिया। इसके बाद हमलावर विजय यादव को पकड़ लिया गया है। क्या विजय यादव कोई नामी गैंगस्टर है? विजय पर कितने आपराधिक मामले हैं? फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। लेकिन मीडिया से हुई बातचीत में विजय यादव के पिता ने अपने बेटे के बारे में काफी कुछ बताया है। लखनऊ कोर्ट परिसर में गोली मारकर संजीव जीवा की हत्या करने वाला आरोपी शूटर विजय यादव उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के केराकत थाना क्षेत्र का रहने वाला है। घटना की जानकारी लगते ही केराकत थाने के सीओ और इंस्पेक्टर पुलिस फोर्स के साथ सरकी चौकी क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव पहुंचे। वहां विजय के परिवार से पूछताछ की गई। विजय के पिता ने बताया आरोपी विजय यादव के पिता श्यामा यादव ने बताया कि, उन्हें विजय को लेकर कोई जानकारी नहीं थी, हाल में उनका विजय से कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। उन्होंने बताया कि, विजय ने शहर के एक डिग्री कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की जिसके बाद वह काम की तलाश में मुंबई गया। मुंबई में वह टाटा की कंपनी में काम करता था, लेकिन काम में मन न लगने की वजह से उसने नौकरी छोड़ दी थी। श्यामा यादव ने बताया – 11 मई को विजय सुल्तानपुर से लखनऊ गया था। वहां भी वो नए काम की तलाश में गया था. श्यामा ने बताया कि, एक दिन विजय का फोन आया और उसने कहा कि, उसे नौकरी मिल गई है। उसने बताया कि, वह जलापूर्ति के लिए पाइप बिछाने वाली किसी कंपनी में काम करता है। विजय यादव का व्यक्तित्व विजय के पिता ने बताया कि, उसे नौकरी मिलने की मुझे खुशी. लेकिन उलसे बाद विजय से हमारा कोई संपर्क नहीं हो पाया, उसे हमने कई बार फोन किया लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ ही आता था। विजय के पिता ने बताया कि, जब मैं बाहर चाय पीने निकला तो मुझे प्रधानजी ने बताया कि आपका बेटे गोलीबारी के कारण सूर्खियों में हैं। मुझे इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। मुझे विश्वास ही नहीं था कि मेरा बेटा भी ऐसा कर सकता है. मुझे हमारे परिचित ने भी मोबाइल में उसकी फोटो बता कर पूछा कि क्या ये आपका बेटा है, मैंने उनसे कहा, हां ये मेरा बेटा है। विजय यादव के भाई ने बताया कि उसका भी विजय से कोई संपर्क नहीं हुआ था। उसने कहा कि, जब भी भाई (विजय) घर पर आता था वो किसी से बातचीत नहीं करता है, उसे खुद में ही रहने की आदत है। वह गांव में ही किसी से बात नहीं करता था। यहां तक कि वह अपने घर से भी ज्यादा बाहर नहीं निकलता था।  

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संजीव जीवा : वेस्ट यूपी का एक कुख्यात अपराधी जो कभी हुआ करता था कंपाउंडर, अपने ही मालिक का कर लिया था किडनैप

उत्तर प्रदेश | आज बात पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की इसलिए क्योंकि बीते दिनों शामली पुलिस ने उसी के गैंग के एक शख्स को एके-47,करीब 1300 कारतूस व तीन मैगजीन के साथ पकड़ा है। शामली पुलिस ने रास्ते में चेकिंग के दौरान अनिल नाम के शख्स को धर दबोचा था। दरअसल, जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। शुरुआती दिनों में वह एक दवाखाना संचालक के यहां कंपाउंडर के नौकरी करता था। 7 जून 2023… शाम के करीब 4 बजे थे। कैसरबाग कोर्ट रूम के अंदर कुछ पुलिसवाले मुख्तार अंसारी से खास शूटर संजीव जीवा को लेकर पहुंचे। हत्या के मामले में उसकी कोर्ट में सुनवाई होनी थी। संजीव एक कुर्सी पर बैठा था। आस पास कई पुलिसवाले और वकील घूम रहे थे। तभी वकीलों की तरह काला कोट पहने एक शख्स आता है और धड़ाधड़ गोलियां चलाना शुरू कर देता है। संजीव को 4 गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौत हो गई। संजीव पहले से उम्रकैद काट रहा था…। वेस्ट यूपी का मोस्ट-वॉन्टेड क्रिमिनल रहा संजीव जीवा कभी घर चलाने के लिए प्राइवेट क्लीनिक में कंपाउंडर का काम करता था। लेकिन पैसों के लालच और अपने ईगो के कारण उसने उसी डॉक्टर को किडनैप कर लिया, जिसने उसे नौकरी पर रखा था। इस घटना के बाद उसके हौसले बुलंद हो गए। धीरे-धीरे उसके अपराध इतने बढ़े कि वह पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया। लखनऊ की जेल में बंद था। उत्तर प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा जितना खेती-किसानी के लिए प्रख्यात है, उतना ही गैंगस्टर और अपराधियों के लिए कुख्यात रहा है। भाटी गैंग, बदन सिंह बद्दो, मुकीम काला गैंग और न जाने कितने अपराधियों के बीच संजीव माहेश्वरी का भी नाम जुर्म की दुनिया में पनपा। 90 के दशक में संजीव माहेश्वरी ने अपना खौफ पैदा शुरू किया, फिर धीरे-धीरे वह पुलिस व आम जनता के लिए सिर दर्द बनता चला गया। आज बात पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की इसलिए क्योंकि बीते दिनों शामली पुलिस ने उसी के गैंग के एक शख्स को एके-47,करीब 1300 कारतूस व तीन मैगजीन के साथ पकड़ा है। शामली पुलिस ने रास्ते में चेकिंग के दौरान अनिल नाम के शख्स को धर दबोचा था। दरअसल, जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। शुरुआती दिनों में वह एक दवाखाना संचालक के यहां कंपाउंडर के नौकरी करता था। इसी नौकरी के दौरान जीवा ने अपने मालिक यानी दवाखाना संचालक को ही अगवा कर लिया था। इस घटना के बाद उसने 90 के दशक में कोलकाता के एक कारोबारी के बेटे का भी अपहरण किया और फिरौती दो करोड़ की मांगी थी। उस वक्त किसी से दो करोड़ की फिरौती की मांग होना भी अपने आप में बहुत बड़ी होती थी। इसके बाद जीवा हरिद्वार की नाजिम गैंग में घुसा और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ जुड़ा लेकिन उसके अंदर अपनी गैंग बनाने की तड़प थी। इसके बाद उसका नाम 10 फरवरी 1997 को हुई भाजपा के कद्दावर नेता ब्रम्ह दत्त द्विवेदी की हत्या में सामने आया। जिसमें बाद में संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। फिर जीवा थोड़े दिनों बाद मुन्ना बजरंगी गैंग में घुस गया और इसी क्रम में उसका संपर्क मुख्तार अंसारी से हुआ। कहते हैं कि मुख्तार को अत्याधुनिक हथियारों का शौक था तो जीवा के पास हथियारों को जुटाने के तिकड़मी नेटवर्क था। इसी कारण उसे अंसारी का वरदहस्त भी प्राप्त हुआ और फिर संजीव जीवा का नाम कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी आया। मुजफ्फरनगर…एक ऐसी जगह जो हमेशा से ही असलहों की खेती के लिए मशहूर रहा है। वहां के एक हाई प्रोफाइल अपराधी रवि प्रकाश तक संजीव का किस्सा पहुंचा तो उसने संजीव को अपना शागिर्द बना लिया। यहीं से संजीव का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा। हालांकि, कुछ सालों बाद मुख्तार और जीवा को साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड में कोर्ट ने बरी कर दिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका है, जबकि उसकी गैंग में 35 से ज्यादा सदस्य हैं। वहीं, संजीव पर जेल से भी गैंग ऑपरेट करने के आरोप लगते रहे हैं। मायावती की जान बचाने वाले नेता की हत्या 90 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी यूपी तक मुख्तार अंसारी, ब्रजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी, बदन सिंह बद्दो और भोला जाट जैसे माफियाओं का दबदबा था। उस वक्त संजीव जीवा अपने छोटे से गैंग को ऑपरेट कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाह रहा था। इसके लिए उसने ऐसा काम किया, जिसने उत्तर प्रदेश में भूचाल ला दिया। संजीव जीवा ने उस बीजेपी नेता की हत्या कर दी, जिसने कभी पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की जान बचाई थी। साल 1997. तारीख 10 फरवरी। बीजेपी के उभरते हुए नेता और विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी फर्रुखाबाद के शहर कोतवाली में अपने घर से कुछ दूर एक तिलक समारोह में शामिल होने गए थे। लौटते वक्त जैसे ही वो अपनी गाड़ी में बैठने लगे, तभी संजीव जीवा ने अपने साथियों रमेश ठाकुर और बलविंदर सिंह के साथ मिलकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। इस हमले में ब्रह्मदत्त द्विवेदी के गनर बीके तिवारी की मौत हो गई। जिन ब्रह्मदत्त की हत्या संजीव जीवा ने की थी। उनके सियासी कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी अंतिम यात्रा में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए थे। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय के सीने में दागीं 400 गोलियां उत्तर प्रदेश अब एक ऐसी घटना का गवाह बनने वाला था, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। जिस राज्य में 10 साल पहले एक भाजपा विधायक को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। वहीं एक बार फिर गोलियों की बारिश होने वाले थी। 10 नहीं 100 नहीं, बल्कि 400 राउंड गोलियां चलने वाली थीं और इस वारदात को अंजाम देने वाला था वही लोगों का ‘डॉक्टर’ संजीव जीवा। हाल ही में प्रशासन ने की उसकी संपत्ति कुर्क जीवा पर साल 2017 में कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड में भी आरोप लगे थे, इसमें जांच के बाद अदालत ने जीवा समेत 4 आरोपियों को

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लखनऊ के कैसरबाग कोर्ट परिसर में चली गोली, गैंगस्टर संजीव महेश्वरी जीवा की हत्या

लखनऊ | पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी संजीव जीवा की लखनऊ सिविल कोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्‍या कर दी गई। अचानक हुई इस घटना से पूरे कोर्ट पर‍िसर में हड़कंप मच गया। बता दें क‍ि हत्‍यारे वकील के भेष में आए थे। वो लंबे समय से लखनऊ जेल में ही सिक्योरिटी बैरक में बंद था। संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा ने वर्ष 1995 से संगीन घटनाओं को अंजाम दिया। संजीव जीवा अंतर राज्य गैंग का लीडर था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, लूट, डकैती, अपहरण, गैंगस्टर जैसी संगीन धाराओं में दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। कोलकाता के एक व्यापारी के बेटे का अपहरण कर दो करोड़ की फिरौती मांगने से लेकर पूर्वांचल के विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी और कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी नाम आया था। संजीव जीवा लखनऊ जेल में बंद था। जीवा माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी के बेहद करीबी माना जाता था। जीवा पर विधायक कृष्णानंद राय तथा पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या का भी आरोप है। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपी मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या के बाद से ही सह अभियुक्त संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। हाल ही में उसकी संपत्ति भी प्रशासन द्वारा कुर्क की गई थी। जीवा पर साल 2017 में कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड में भी आरोप लगे थे, इसमें जांच के बाद अदालत ने जीवा समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि जीवा फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है, लेकिन साल 2021 में जीवा की पत्नी पायल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी (जीवा) जान को खतरा है। बता दें कि, पायल 2017 में आरएलडी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं और उन्हें हार मिली थी। संजीव की पत्नी पायल महेश्वरी ने कुछ दिन पहले ही जताई थी हत्या की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी  भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में जेल में बंद संजीव जीवा की पत्नी ने अपने पति की हत्या की आशंका जताई संजीव जीवा की पत्नी और रालोद नेता पायल माहेश्वरी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अपने पति की सुरक्षा की गुहार की है. पायल का कहना है कि पेशी के दौरान षड्यंत्र के तहत उनके पति की हत्या कराई जा सकती है. उन्होंने पति की सुरक्षा के लिए सीजेआई से उच्चाधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है 2017 में पायल महेश्वरी लड़ चुकी है रालोद के टिकट पर विधानसभा का चुनाव वकील की ड्रेस में क़ातिल। मौके पर पुलिस ने धर दबोचा है।

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मुख्तार अंसारी को आजीवन जेल की सजा, 32 साल पुराने इस केस में हुए दोषी करार

उत्तर प्रदेश | जेल में बंद मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी एमपी एमएलए कोर्ट ने 32 साल पुराने अवधेश राय हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुना दी है. इसके साथ ही मुख्तार अंसारी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। पांच बार के विधायक अंसारी पर 1991 में कांग्रेस नेता की हत्या का आरोप लगा था। 31 साल पुराने मामले में मुख्तार अंसारी को बांदा जेल से वर्चुअली पेश किया गया. जबकि केस के अन्य आरोपी कोर्ट में फिजिकली पेश किए गए. इस दौरान कचहरी परिसर के अंदर और बाहर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही. वहीं पुलिस की गुप्तचर शाखा ने मुख्तार के करीबियों की सूची बनाकर उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखा. 3 अगस्त 1991 को कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक अजय राय के भाई अवधेश राय की वाराणसी में अजय राय के घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में आरोपी पूर्व विधायक अब्दुल कलाम और कमलेश की मौत हो चुकी है, अन्य आरोपी जेल में बंद हैं। वाराणसी एमपी एमएलए कोर्ट ने 19 मई को बहस के बाद सुनवाई पूरी की थी और अपना आदेश सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने फैसला सुनाने की तारीख 5 जून तय की थी। बता दें कि पांच बार विधायक रह चुके मुख्तार अंसारी पहले ही अपहरण और हत्या के एक अन्य मामले में 10 साल की जेल की सजा काट रहे हैं। उन्हें अप्रैल में दोषी ठहराया गया था। बता दें कि इससे पहले अप्रैल में गाजियापुर की एक अदालत ने अंसारी को 2007 में गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद थाने में दर्ज उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एक्ट मामले में दोषी ठहराया था और 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। यह चौथा मामला है जिसमें अंसारी को दोषी करार दिया गया है। अवधेश राय हत्याकांड की जांच प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित चेतगंज थाना क्षेत्र के लहुराबीर इलाके में 3 अगस्त, 1991 को अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कांग्रेस नेता अजय राय ने आरोप लगाया था कि हथियारबंद हमलावरों ने उनके भाई अवधेश राय को दिनदहाड़े गोली मार दी थी। घायल अवस्था में उन्हें कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना को लेकर मृतक के भाई और पूर्व विधायक अजय राय ने मुख्तार अंसारी, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम, राकेश न्यायिक समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। 31 साल पुराने इस मामले में अभियोजन और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद मुख्तार को उम्र कैद की सजा सुनाई। हत्या के समय मुख्तार अंसारी विधायक नहीं थे। जब केस में फैसला आया तो भी वह विधायक नहीं हैं। अवधेश राय हत्याकांड मामले की जांच सीबी-सीआईडी ​​को सौंपी गई थी। दिलचस्प बात यह है कि जून 2022 में मामले की सुनवाई के दौरान पता चला कि केस डायरी गायब हो गई है। फोटोकॉपी के आधार पर पूरे मामले की सुनवाई हुई। यह पहला मामला है जहां डुप्लीकेट पेपर के आधार पर फैसला सुनाया गया है।    

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मुख्तार अंसारी पर ED ने कैसा शिकंजा,भाई अफ़ज़ाल की 12 करोड़ की संपत्ति जब्त

गाज़ीपुर। कुख्यात मुख्तार अंसारी के भाई और बसपा सांसद अफजाल अंसारी के ऊपर ED का शिंकजा कसता जा रहा है। ईडी की ताबड़तोड़ रेड के बाद अब जिला प्रशासन ने अफजाल अंसारी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिला प्रसाशन ने अफ़ज़ाल अंसारी की 12 करोड़ की सम्पत्तियाँ जब्त कर ली हैं। गौरतलब है की प्रवर्तन निदेशालय ने बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच के सिलसिले में भाई अफजल अंसारी के घर पर गुरुवार को छापेमारी की थी जिला प्रशासन ने गाजीपुर मुहम्मदाबाद के माचा गांव में 12.35 करोड़ की सम्पत्ति कुर्क की है. प्रशासन ने अफजाल अंसारी का फार्म हाउस कुर्क किया है, जो अफजाल की पत्नी और बेटियों के नाम पर है. इतना ही नहीं, पुलिस ने अफजाल के फार्म हाउस समेत 2 अन्य खेत भी कुर्क किए हैं. पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट 14(1) के तहत यह कार्रवाई की है। इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने जुलाई में गैंगस्टर अधिनियम के तहत अफजल अंसारी की 14.90 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की थी. अफजाल अंसारी ने गाजीपुर लोकसभा से 2019 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी. मुख्‍तार पर कार्रवाई के बाद से ही मुख्तार के करीबियों पर ईडी की नजर बनी हुई थी. गुरुवार की सुबह मुख्‍तार और अफजाल के करीबी गणेश मिश्रा, एक बस मालिक व एक अन्‍य उद्यमी के यहां ईडी की छापेमारी हुई थी। सूत्रों की मानें तो मुख्तार अंसारी और अन्य के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का मकसद धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत अंसारी के खिलाफ जारी जांच के संबंध में सबूत एकत्र करना है. संघीय एजेंसी पांच बार के पूर्व विधायक के खिलाफ जमीन हथियाने, हत्या और जबरन वसूली के आरोपों सहित कम से कम 49 आपराधिक मामलों में जांच कर रही है. उत्तर प्रदेश में मुख्तार खिलाफ हत्या के प्रयास और हत्या सहित कई मामलों में मुकदमे चल रहे हैं

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