उन्होंने कहा कि अदालत का मानना था कि इस प्रकरण में जनहित याचिका का औचित्य नहीं बनता, बल्कि इसके समाधान के लिए अन्य संवैधानिक उपाय ज्यादा उपयुक्त हैं। इसी क्रम में, सर्वोच्च न्यायालय ने बाबूलाल मरांडी की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए यह निर्णय लिया कि इस मामले को पीआईएल के रूप में नहीं, बल्कि रिट याचिका के रूप में सुना जाएगा। यह रिट याचिका झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति और चयन प्रक्रिया को चुनौती देती है, जिस पर अब सर्वोच्च न्यायालय सीधे तौर तीन हफ़्ते बाद विचार करेगा।
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