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November 1, 2022

दो से चार नवंबर तक आईजीपी में होगा कृषि आधारित एमएसएमई उद्यमी महासम्मेलन

लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने पहले कार्यकाल से यह मानना रहा है कि उत्तर प्रदेश पर प्रकृति एवं परमात्मा की असीम अनुकंपा है। दुनियां की सबसे उर्वर भूमि में शुमार इंडो गंगेटिक बेल्ट का विस्तृत भूभाग, इसको सींचने वाली गंगा, यमुना एवं सरयू जैसी सदानीरा नदियां और 9 तरह के कृषि जलवायु क्षेत्र खेतीबाड़ी की संभवनाओं को और बढ़ा देते हैं। अगर हम अपनी उपज का प्रसंस्करण कर उनका मूल्य संवर्धन कर दें तो कई लाभ होंगे। मसलन किसानों को उनकी उपज का दाम मिलेगा। प्रसंस्करण संबंधी उद्योग स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर उपज की ग्रेडिंग,पैकिंग, ट्रांसपोर्टेशन, लोडिंग,अनलोडिंग, मार्केटिंग के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। किसानों की आय तो बढ़ेगी। साथ ही ये इकाइयां हर परिवार, एक रोजगार एवं प्रेदश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुचाने में भी मददगार होंगी। खेतीबाड़ी से जुड़े करीब 15 उत्पादों के उपज में यूपी नंबर वन है। इस वजह से यहां खाद्य प्रसंस्करण की संभावना और बढ़ जाती है। – फ़ूड एक्सपो-2022 से प्रसंस्करण क्षेत्र की संभावनाओं को मिलेगा व्यापक फलक – इस क्षेत्र की 15000 इकाईयां, राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थान लेंगे भाग सरकार भी इन संभावनाओं से भलीभांति वाकिफ है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 2 से 4 नवम्बर को आयोजित कृषि आधारित एमएसएमई उद्यमी महासम्मेलन एवं इंडिया फ़ूड एक्सपो 2022 की तैयारियों के बाबत आयोजित पत्रकारवार्ता में प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यूपी की अर्थव्यवस्था लगभग 250 बिलियन डॉलर की है। इसमें से 4.5 लाख करोड़ रुपये कृषि और 50 हजार करोड़ रुपये का योगदान फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र का है। प्रदेश में हजार 70 पंजीकृत और लाख 20 गैर पंजीकृत एमएसएमई इकाइयां हैं। टेक्सटाइल सेक्टर के बाद फूड सेक्टर में ही सबसे ज्यादा रोजगार उपलब्ध है। प्रदेश पूरे देश में एमएसएमई सेक्टर के तहत लोगों को राेजगार उपलब्ध कराने में दूसरा स्थान रखता है। ऐसे में प्रदेश को वन ट्रिलियन इकॉनमी बनाने में फूड प्रोसेसिंग का अहम रोल है। आयोजन में भाग लेने वाले संस्थान (कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैकेजिंग, केन्द्रीय खाद्य प्रोद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, फ्लेवर्स एंड फ्रेगरेंस विकास केंद्र कन्नौज, यूपीसीडा, योजना विभाग) एवं इस क्षेत्र से जुड़ी 1500 इकाइयों के डेमो, एवं विषय विशेषज्ञों के सेमिनार से प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को अपने विस्तार का एक नया फलक मिलेगा। क्या कहती है ग्रैंडथार्टन की रिपोर्ट देश के शीर्षस्थ औद्योगिक संगठन एसोचैम और चार्टर्ड एकाउंटेंट की वैश्विक संस्था ग्रैंडथार्टन की एक रिपोर्ट में भी इस क्षेत्र की संभावनाओंभी चर्चा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 तक इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ रोजगार के मौके सृजित होंगे। इसमें से करीब 10 लाख लोगों को तो सीधे रोजगार मिलेगा। शहरीकरण, एकल परिवार के बढ़ते चलन के कारण प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की मांग बढनी ही है। विदेशी बाजारों में भी ऐसे गुणवत्ता युक्त उत्पादों की अच्छी मांग है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने पहले कार्यकाल से ही यह मानना रहा है कि खाद्य पदार्थों, सब्जियों और फलों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से ही किसानों की आय बढ़ेगी। योगी 2.0 की शुरुआत में भी खेतीबाड़ी से जुड़े सात विभागों की मंत्री परिषद के समक्ष हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि पहले चरण में वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, बुलन्दशहर और लखीमपुर खीरी के लिए इस बाबत योजना तैयार की जाय। प्रदेश की लगभग सभी मंडियों में इतनी जमीन है कि उनमें वहां की जरूरत के अनुसार प्रसंस्करण इकाइयां लगाई जाय। लिहाजा मंडियों में पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाय। ऐसी ही पहल हर जिले में बने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के लिए भी की जाय। यही नहीं तैयार और कच्चे माल के सुरक्षित भंडारण के लिए स्टोरेज बनाने का निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिया था। उत्तर प्रदेश में संभावनाएं चूंकि यूपी गेंहू,गोभी, तरबूज, आम, अमरुद, आवला, शाक भांजी, मेंथा, दूध और मांस आदि के उत्पादन में देश में नंबर एक है। सर्वाधिक आबादी के नाते श्रम और बाजार भी कोई समस्या नहीं है। 9 तरह के कृषि जलवायु क्षेत्र और भरपूर पानी की उपलब्धता की वजह से किसानों को प्रसंस्करण इकाइयों की मांग के अनुसार फसल उगाना आसान है। इन्हीं संभावनाओं के मद्देनजर योगी सरकार का जोर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने का है। दो से चार नवम्बर तक होने वाले आयोजन का मकसद भी यही है। योगी सरकार की अब तक की पहल भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र-2022 में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 6 मेगा फ़ूड पार्क लगाने के प्रति प्रतिबद्धता जतायी थी। उसी प्रतिबद्धता के क्रम में गत दिनों खेतीबाड़ी से जुड़े सात विभागों की मंत्री परिषद के समक्ष हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में सरकार सहारनपुर, लखनऊ, हापुड़, कुशीनगर, चन्दौली व कौशाम्बी में आलू और क्षेत्र विशेष की फसलों को ध्यान में रखते हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजनांतर्गत 14 नए इन्क्यूबेशन सेंटरों का निर्माण शुरू करने की तैयारी है। अब तक के कार्य और नतीजे अपने पहले कार्यकाल के शुरुआती दिनों में ही नई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति जारी कर सीएम योगी ने संभावनाओं से भरे इस सेक्टर को एक दिशा दी थी। लगातार कोशिशों के नतीजे भी सकारात्मक रहे। इस दौरान उद्यान (हॉर्टिकल्चर) सेक्टर में जहां फल, शाकभाजी, फूल, मसाला फसलों आच्छादन में 1.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल का विस्तार हुआ तो उत्पादन में भी 07 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडो-इजराइल तकनीक पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बस्ती (फल) और कन्नौज (सब्जी) में स्वीकृत हुआ तो संरक्षित खेती से पुष्प और सब्जी उत्पादन के लिए 177 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 554 किसानों द्वारा पॉलीहाउस/शेडनेट हाउस भी तैयार कराया गया। आलू के भंडारण की क्षमता में 30 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई तो प्याज भंडारण के लिए करीब 200 भंडारण केंद्र बनाए गए। योगी सरकार-2 की कार्ययोजना कृषि उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन देने की रणनीति के तहत जल्द ही फसल विशेष के लीड 4000 नए एफपीओ बनाने की तैयारी है। इन्हें 18 लाख रुपए तक का अनुदान भी देय होगा। रोजगारोन्मुखी कोशिशों के तहत

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्रेटर नाेएडा में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया वाटर वीक-2022 के उद्धाटन समारोह में हुए शामिल

ग्रेटर नाेएडा/लखनऊ | प्रदेश में पहले गंगा का सबसे क्रिटिकल प्वाइंट कानुपर हुआ करता था, लेकिन आज नमामि गंगे प्रोजेक्ट से कानपुर का सीसामऊ सीवर प्वाइंट सेल्फी प्वाइंट बन गया है। इतना ही नहीं नमामि गंगे परियोजना के पहले और बाद के बदलाव का असर अब अविनाशी काशी में भी दिखाई पड़ता है। पहले  गंगा का जल आचमन करने योग्य नहीं होता था, आज गंगा में डॉल्फिन भी दिखाई पड़ती हैं। गंगा की अविरलता और निर्मलता दोबारा नमामि गंगे प्रोजेक्ट से प्राप्त हुई है। वहीं दिसंबर तक बुंदेलखंड के हर घर में नल से जल पहुंच जाएगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया वाटर वीक-2022 के उद्धाटन समारोह में कही। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत आदि मौजूद रहे। प्रदेश में जल की पर्याप्त उपलब्धता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही कुछ संकल्प लिए थे, उनमें से जल संचयन भी एक संकल्प था, जिसके परिणाम आज सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश में जल की पर्याप्त उपलब्धता के साथ पर्याप्त जल संसाधन भी हैं। पहले प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र को जल संचयन के मामले में डार्क क्षेत्र माना जाता था। इन क्षेत्राें में हमने पिछले कुछ वर्षों में जल संचयन को लेकर पर्याप्त उपाय कर आज हर घर में साफ पानी पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हर घर नल योजना को दिसंबर-2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। प्रदेश में 60 से ज्यादा नदियों को किया जा चुका है पुनर्जीवित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक बड़े भूभाग पर हिमालय से आने वाली नदियां हैं, जो अपने साथ पर्याप्त सिल्ट लेकर आती हैं, जिससे कई नदियां लुप्त होने की कगार पर आ गई थी। हमें उनके पुर्नोद्धार कर उन्हे नया जीवन दिया। अब तक प्रदेश में 60 से ज्यादा नदियों को पुनर्जीवित किया जा चुका है। प्रयागराज में कुम्भ गंगा के संगम तट पर सम्पन्न हुआ, जिसमें दशकों बाद श्रद्धालुओं और संतों ने यह पहली बार अहसास किया कि गंगा का जल भी आचमन योग्य है। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जहां प्लास्टिक थर्माकोल को प्रतिबंधित कर दिया गया है। बढ़ती हुई आबादी हमको जल संकट के लिए आगाह कर रही है ऐसे में प्रदेश में जल संरक्षण के लिए अलग-अलग स्तर पर पर्याप्त प्रयास और कार्य किए जा रहे हैं। शुद्ध पेयजल आज जीवन को बचाने की सबसे बड़ी जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अब तक 58 ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर के कार्य को पूरा किया जा चुका है और इसे युद्धस्तर पर तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों का बिछा जाल, 14 शहरों में दौड़ रहीं 583 इलेक्ट्रिक बसें

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के नागरिकों को प्रदूषण रहित और सुविधाओं से लैस पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए गंतव्य तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने बड़ी तैयारी की है। 2020 में इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इलेक्ट्रिक बस की संकल्पना को मूर्त रूप दिया गया था और देखते ही देखते 2 साल में यह 14 बड़े शहरों में लागू हो चुकी है। इन शहरों में शुरुआत में कुल 700 बसों की फ्लीट चलाने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 2 लॉट में कुल 614 बसों की डिलीवरी हो चुकी है। वहीं, 583 बसों का संचालन भी हो रहा है। जल्द ही 86 बसें भी डिलीवर हो जाएंगी, जिसके बाद इन शहरों में पूरी फ्लीट कंप्लीट हो जाएगी। वहीं, जिन शहरों में अभी इलेक्ट्रिक बसों की शुरूआत नहीं हो सकी है, वहां भी इसकी संभावनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। गौरतलब है कि इन बसों के जरिए प्रदेश के नागरिक तुलनात्मक रूप से कम किराए में वातानुकूलित बसों में आरामदायक सफर तय कर रहे हैं। वहीं, पर्यावरण को भी डीजल-पेट्रोल बसों के खतरनाक धुएं से निजात मिल रही है। आगरा, लखनऊ और कानपुर में सबसे बड़ी फ्लीट प्रदेश में सबसे ज्यादा आगरा, लखनऊ और कानपुर में बसों की फ्लीट दौड़ रही है। इन शहरों में 100-100 बसें चलाने का लक्ष्य है, जिसमें से आगरा में 76, लखनऊ में 100 और कानपुर में 82 बसें संचालित हो रही हैं। लखनऊ और कानपुर में सभी 100 बसों की डिलीवरी की जा चुकी है तो आगरा में 89 बसों की डिलीवरी हो चुकी है। अन्य शहरों की बात करें तो मथुरा-वृंदावन, वाराणसी और प्रयागराज में 50-50 बसों की फ्लीट संचालित हो रही है। वहीं, गाजियाबाद और मेरठ में 30-30, अलीगढ़, गोरखपुर और झांसी में 25-25 व बरेली, मुरादाबाद और शाहजहांपुर में 10 बसों की फ्लीट दौड़ रही है। कुल मिलाकर प्रदेश के 14 शहरों में 583 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि कुल 614 बसों की डिलीवरी पूरी हो चुकी है। – आगरा, लखनऊ और कानपुर में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें हो रहीं संचालित -जल्द ही इन सभी 14 शहरों में पूरी हो जाएगी 700 इलेक्ट्रिक बसों की फ्लीट – 966 करोड़ की लागत से शुरू हुई योजना, सरकार की ओर से दी जा रही 315 करोड़ रुपए की सब्सिडी 315 करोड़ की दी गई सब्सिडी बीते दिनों मुख्य सचिव डीएस मिश्रा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जुड़ा प्रस्तुतिकरण किया गया। इसके मुताबिक, 11 मार्च 2020 को बस ऑपरेटर एग्रीमेंट के तहत यूपी में इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का फैसला लिया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल कॉस्ट 966 करोड़ है जिसमे 315 करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रदान की गई है। इसमें भारत सरकार की ओर से 270 करोड़ तो यूपी सरकार की ओर से 45 करोड़ रुपए की सब्सिडी शामिल है। यह पूरा प्रोजेक्ट फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाईब्रिड व्हीकल्स इन इंडिया (फेम-2) के तहत शुरू किया गया है। फेम-1 की शुरुआत 2010 में हुई थी जब जेएनएनयूआरएम के तहत सिटी बस सर्विस की जिम्मेदारी यूपीएसआरटीसी को दी गई। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 1140 बसों की फ्लीट को सड़क पर उतारा गया था। हालांकि, इसमें इलेक्ट्रिक बसें महज 40 ही थीं, जिन्हें 2018 में सबसे पहले लखनऊ में उतारा गया। यह प्रोजेक्ट सिर्फ 7 शहरों के लिए था, जिसमे कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, आगरा और मथुरा शामिल थे। फेम-2 में इस योजना को विस्तार दिया गया है और सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों को ही प्राथमिकता दी गई। फेम-2 में जोड़े गए 7 शहर फेम-1 में जहां सिर्फ 7 शहरों को शामिल किया गया था तो फेम-2 में 7 अन्य शहरों को भी इसमें जोड़ दिया गया। इसके तहत जो 700 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित की गई थीं, उनमें से 600 को फेम-2 के तहत सैंक्शन किया गया तो 100 बसें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सैंक्शन हुई। प्रदेश सरकार की ओर से सैंक्शन बसों को मथुरा-वृंदावन, शाहजहांपुर और गोरखपुर में संचालित किया जा रहा है। सुरक्षित हो रही आबो-हवा भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक बसों का प्रचलन बढ़ रहा है। भारत ने 2070 में शून्य उत्सर्जन को हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू की जा रही हैं। इसी के अनुरूप प्रदेश सरकार ने सिटी ट्रांसपोर्ट के रूप में इलेक्ट्रिक बसों को तरजीह दी है। इससे न सिर्फ शहरों की आबो-हवा दुरुस्त होगी, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए डीजल-पेट्रोल की निर्भरता भी कम होगी। साथ ही, लोगों को भी आरामदायक और वातानुकूलित बसों में कम पैसों में सफर का आनंद मिलेगा।

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सनसनी ख़ेज़ ट्रिपल मर्डर से दहला बदायूं, घर में घुसकर सपा नेता व उनकी पत्नी और माँ की गोली मारकर हत्या

उत्तर प्रदेश | यूपी के बदायूं जिले में गोली मारकर तीन लोगों की हत्या की बड़ी वारदात सामने आई है. यहां पूर्व ब्लॉक प्रमुख/जिला पंचायत सदस्य, उनकी पत्नी और मां की राजनीतिक रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए हैं. ट्रिपल मर्डर की वारदात से इलाके में दहशत का माहौल है. पूरा मामला ! मामला उसहैत थाना क्षेत्र के सथरा गांव का है. यहां के रहने वाले पूर्व ब्लाक प्रमुख/ जिला पंचायत सदस्य और एसपी नेता राकेश गुप्ता अपने घर में अपनी मां और पत्नी के साथ थे. इस दौरान राकेश के घर में कुछ बदमाश घुस आए. इस दौरान उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें पूर्व ब्लाक प्रमुख राकेश गुप्ता उनकी पत्नी शारदा और मां शांति देवी की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई. ट्रिपल मर्डर की वारदात के बाद कई थानों की पुलिस और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. सबसे पहले पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और मामले की पड़ताल शुरू कर दी. ट्रिपल मर्डर के पीछे राजनीतिक रंजिश बताई जा रही है, क्योंकि पूर्व ब्लाक प्रमुख के परिवार में कई लोग ग्राम प्रधान भी रहे हैं. मामले में एसएसपी डॉक्टर ओपी सिंह ने बताया परिजनों की ओर से अभी तक कोई तहरीर नहीं दी गई है. गोली लगने से 3 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है. फिलहाल, तीनों शवों के पोस्टमार्टम कराए जा रहे हैं. परिजन जो भी तहरीर देंगे उसके आधार पर और जांच में जो भी तथ्य निकल कर आएंगे सख्त कार्रवाई की जाएगी. बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से दुख व्यक्त किया और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है. बताया जा रहा है कि पूर्व ब्लाक प्रमुख/जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता समाजवादी पार्टी के सक्रिय नेता थे. वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस वारदात पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. एसपी ने ट्वीट कर लिखा कि “बदायूं में राजनीतिक रंजिश के चलते सत्ता संरक्षित बदमाशों के द्वारा सपा के पूर्व ब्लाक प्रमुख, उनकी पत्नी और मां की गोली मारकर नृशंस हत्या प्रदेश में हाशिए पर जा चुकी कानून व्यवस्था की देन है. शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना. हत्यारों के खिलाफ हो कठोरतम कार्रवाई.  

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KIIT विश्वविद्यालय में हर्ष-उल्लास के साथ मनाई गई छठ पूजा, आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

भुबनेश्वर | उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक छठ पूजा का भव्य आयोजन KIIT विश्वविद्यालय में हुआ। लोक आस्था के इस महापर्व के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किट और किस विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ० अच्युता सामंत, KIIT विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० सश्मिता सामंत और कुलसचिव ज्ञान रंजन महंती मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस कार्यक्रम में KIIT विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले उत्तर भारत के हजारों छात्र और छात्राओं ने भाग लिया और छठी  मैया की पूजा अर्चना की। छठ पूजा के अवसर पर डॉ अच्युता सामंत ने छठ महापर्व के महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि, यह पर्व सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि एक संस्कृति है जो लोगों में परस्पर सहयोग और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने सभी छात्र और छात्राओं को बधाई दी और सभी के स्वस्थ्य रहने की कामना की। डॉक्टर सामंता ने सूर्य देव से सभी के जीवन में प्रेम, सुख-शांति और समृद्धि की चमक बिखेरने की कामना की। गौरतलब है की KIIT विश्वविद्यालय में देश के हर राज्य के तीस हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। KIIT विश्वविद्यालय की खासियत है कि साल के अलग-अलग समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व-त्योहारों का आयोजन यहां किया जाता है।

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